सोमवार, 23 जुलाई 2012

मथुरा के निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 जुलाई को कल


आज तक सब प्रत्याशी फुल स्टॉप,कल चन्द रहेगे नान स्टॉप 


मथुरा। मथुरा जनपद में निकाय चुनावो की सरगर्मी अभी थमने का नाम नहीं ले रही अध्यक्ष व सभासद पद हेतु लगभग 1100 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है जो चुनाव प्रचार की अंतिम तिथि 18 तक अपनी जीत के सारे अठ्ठे पंजे लड़ा चुके है 20 को वोट पड़ने से पहले 19 की रात तक प्रत्याशियों ने जमकर मतदाताओ को लुभाने की खातिर चुनाव आयोग के कायदे कानून की धज्जीया उड़ाते हुए धन वर्षा के साथ खूब शराब बाटी किसी ने घेवर बाटे किसी ने इनव्टर लगवाये किसी ने बैण्ड बजवाया तो किसी ने नोटंकी गव्वायी यही वजह है कि कोई भी प्रत्याशी अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है, सभी अपनी जीत के प्रति अस्वस्थ नजर आ रहे है।
      अब प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 जुलाई को कल देर साय तक होगा इनके भाग्य अभी मतपेटिका में बन्द है हर प्रत्याशी की नीद भूख उड़ी हुई है पर अपने को जीता हुआ बता रहे है नगर सीट पर भाजपा प्रत्याशी मनीषा गुप्ता और सपा समर्पित लता अग्रवाल को ही फाइट में माना जा रहा है ऐसा आंकलन शहर के सटोरियों का भी है पर वो भी वैश्य वोटो को लेकर असमंजस की स्थिति में है एक सटोरिया ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की हम ये नहीं समझ पा रहे है कि अधिक वैश्य वोट किसको मिला है जीत उसी की है।
  बहराल कल सबके भाग्य का फैसला होना है...यानि...आज तक सब प्रत्याशी फुल स्टॉप,कल कल चन्द रहेगे नान स्टॉप
          नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
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सोमवार, 16 जुलाई 2012

कांगेस में दो फाड़ से भाजपा की राह आसान

मथुरा। मथुरा कांगेस में निकाय चुनावो में टिकट को लेकर छिड़ी जंग अब सडको पर साफ दिखाई दे रही है कांगेस के वरिष्ठ नेता शिक्षाविद कुलदीप भार्गव ने कांगेस का संबल ना मिलने से कुपित होकर अपनी पत्नी रश्मि भार्गव को निर्दलीय ही मैदान में उतार दिया और कांगेस का बुद्धजीवी तबका रश्मि के खेमे में जा कूदा इधर रश्मि की योग्यता को देखते हुए  बसपा ने भी अपना समर्थन दे डाला जबकि मुस्लिम वोट इस बार सपा समर्पित डा. अशोक अग्रवाल की पत्नी लता को मिल रहा है हाल ही में हुए विधान सभा चुनावो में ब्रह्ममन कार्ड फेल होने से कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना शर्मा को काफी संघर्ष से जूझना पड़ेगा। वही वैश्यों का झुकाव इस वार भाजपा से दो बार नगर अध्यक्ष रहे राजेश गुप्ता की पत्नी मनीषा गुप्ता को अच्छा समर्थन मिलने से मथुरा नगर की जनता का यह मनना है कि भाजपा की होने वाली जीत कांग्रेस के दो फाड़ व विधायक की अकर्मंद्ता का प्रतिफल होगा।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

मथुरा निकाय चुनावो में टिकट वितरण को लेकर   


कांग्रेस में फूटे असन्तोष के स्वर.......


मथुरा। उत्तर प्रदेश में अंतिम चरण में हो रहे निकाय चुनावो में कर्मठ पात्रो को वंचित कर अपात्रों को टिकट देने का मामला अब कांग्रेस पार्टी में तूल पकड़ता जा रहा है एक ग्रहणी महिला प्रत्याशी बनाये जाने कुपित सक्रिय महिलाये स्थानीय स्तर पर बायोडाटा देने के वावजूद टिकट से वंचित रही वही एक ऐसी महिला को टिकट दिया है जो बोलना भी नहीं जानती है नगर पालिका को कैसे चलाएगी यह एक विचारणीय प्रश्न है इससे यह स्पष्ट है की सीट जीतने के बाद इनके पति प्रतनिधि के रूप में पालिका को चलायेगे। इसे लेकर कांगेस कार्यकर्त्तओ में रोष व्याप्त है।
                बताया जाता है कि विधान मंडल दल के नेता व मथुरा-ब्रन्दावन छेत्र के विधायक प्रदीप माथुर एव अब तक रहे मथुरा से नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय उर्फ़ बिट्टू इन दोनों के बीच घमासान वर्चश्व की जंग चली आ रही है इसी के चलते विधायक ने हस्तक्षेप कर बिट्टू की भाभी की टिकट काट कर अपने चहेते एन डी तिवारी कांगेस से पूर्व में पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ टुनटुन भैया की ग्रहणी पत्नी को दिलवाकर वर्चश्व की जंग तो जीत ली अब कुर्सी कैसे जीतेगे इसको लेकर ब्रह्मामन एकता का नारा पुन: लगाया जा रहा है जबकि हालही में हुए विधान सभा के चुनावो में ब्रह्मामन कार्ड पूरी तरह फेल हो चुका है।
      ये तो बात कर रहे थे कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ताओ के श्री मुख की और उनके असहनीय दर्द की सूत्र बताते है कि मथुरा जनपद में इस बार वार्ड स्तर पर भी सक्रिय कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर उन को टिकट वितरित किये गए है जिनका कांगेस से कोई लेना देना भी नहीं रहा है या वो सक्रिय कार्यकर्त्ता नहीं रहे...भीषण गर्मी ऊपर से अपमान यही वजह है कि सक्रिय कार्यकर्त्ता अपने घरो से निकलने में भी गुरेज कर रहे है।
               वर्षो से कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य कर रही महिला कार्यकर्ताओ को टिकट ना मिलने से व्यथित है उन्होंने पार्टी की रीती नीति को जनता के बीच जोर शोर से प्रचारित किया नगर में पार्टी का कद बडाया किन्तु पार्टी ने उनका कद घटा दिया अब देखना है कि क्या असंतुष्ठो को सन्तुष्ट कर पायेगी कांग्रेस।   
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शुक्रवार, 29 जून 2012

              मथुरा निकाय चुनाव भाजपा में घमाशान 

  दाड़ी वाले के हाथ में गरसा और गोस्वामी के हाथ में फरसा 

   कैसे जीतेगी राजेश की मनीषा मोतारमा.......?

मथुरा। भाजपा का विधान सभा में ब्राहमण कार्ड फेल हो जाने के बाद निकाय चुनावो में वैश्य प्रत्याशी का चुनावो में उतारा जाना तय था इसी क्रम में मनीषा गुप्ता को नगर का प्रत्याशी घोषित किया गया जिसके चलते विरोध के स्वर मुखर हो गये जिससे कोसीकला व ब्रन्दावन सीटो की मुफ्त में बली चढ़ गयी भाजपा से मथुरा से नगर के दो बार अध्यक्ष रहे राजेश गुप्ता अपनी पत्नी मनीषा गुप्ता को टिकट तो हासिल कर ली कुर्सी हासिल कैसे करेगे...यह एक विचारणीय प्रश्न है।
मथुरा सीट पर भाजपा से विधायक व मंत्री रह चुके एक दाड़ी वाले अपने को व्यपारियो का नेता कहने वाले कार्यकर्ताओ के अरमानो का गला घोट कर अपनी राजनैतिक धार व धाक रखने में माहिर हर जगह सुर्खियों में बने रहने के चक्कर में संघटन को जिले में से  ख़त्म करने पर आमादा है।विधान सभा चुनावो में भी मथुरा सीट से देवेन्द्र कुमार शर्मा भी दाड़ी वाले बाबा को रास नहीं आये पिछले निकाय चुनावो में नवीन मित्तल भी पसन्द नहीं आये जो उनकी हार का मुख्य कारण बनी इनसे पहले प्रदीप गोस्वामी की टिकट फ़ाइनल हो चुकी को एक पत्रकार के सहयोग से कटवायी गयी इस बार मथुरा में निकाय चुनावो में अध्यक्ष पद के लिये मनीषा गुप्ता के नाम से बोखलाये दाड़ी वाले ने ब्रन्दावन में मुकेश चतुर्वेदी व हरिओम शर्मा की जहा टिकट होने नहीं दी वही कोसीकला में चोधरी पूरन सिहं एडवोकेट की फ़ाइनल टिकट कटवाकर उधोग जगत के अपने आप को भाजपा का वरिष्ठ नेता कहने वालो के मुंह पर एक तमाचा ऐसा मारा है कि पुरे भाजपा व संघ के नेताओ में घमासान मच गयी है ऐसे में मनीषा गुप्ता का निकाय चुनाव की मथुरा सीट को जीतना काँटों भरे ताज के समान हो गयी है क्योकि जहा दाड़ी वाला गरसा लेकर हरवाने के लिए कमर कस ली है वही सुनीता गोस्वामी को टिकट ना मिलने से नाराज उनके पति प्रदीप गोस्वामी भी भाजपा की बैंक वोट को काटने पर आमादा है जबकि कार्यकर्ताओ में इस दाड़ी वाले नेता को लेकर काफी आक्रोश है पूर्व में भी ये काग्रेस के लिए काम किया था ये दाड़ी वाला काग्रेस का एजेंट है और इस बार भी ऐसा ही होने वाला है इस बार कार्यकर्ताओ ने प्रदेश व राष्ट्रीय नेताओ को अवगत भी कराया था कि इस दाड़ी वाले के रहते जनपद में  संघटन ख़त्म हो रहा है इसके वावजूद भी टिकटों के वितरणों में हुई धाधली से कार्यकर्त्ता आपे से बाहर है कार्यकर्ताओ का तो यहा तक कहना है कि  तो जनपद के वरिष्ठ नेता कहने वालो को त्यागपत्र दे देना चाहिए या इस दाड़ी वाले का निष्कासन करवाना चाहिए।
    अब सवाल उस भाजपा का है जो अपना जनाधार खो चुकी है उसे वापस कैसे लाये किन्तु घर के विभिषनो से कैसे निपटा जाये अब राजेश गुप्ता अपनी पत्नी मनीषा गुप्ता को लेकर चिन्तित है कि मोतरमा को जिताया कैसे जाये।
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सोमवार, 25 जून 2012

पटेल थाम सकते है सपा का दामन......?

मथुरा। दुलमुल होती निकाय चुनावो की लेट घोषणा ने जहा सभी दलों का गडित बिगाड़ा वही सपा व् भाजपा के लिए मथुरा एव कोसीकला प्रतिष्ठा  का प्रश्न बन गये है जहा भाजपा कोसी में दंगो में शान्ति  बहाली के लिए सारात्मक भूमिका निभाने वाले की पक्षधर है वही सपा बिना संबल के गूर्जर जाति से हरी सिंह पटेल पर दाव लगाने की भूमिका में नजर आ रही है जिसकी नगर में जोरो से चर्चाओ का बाजार गर्म है ।
       व्ही भगवत रूहेला को भाजपा दमदार प्रत्याशी के रूप में नहीं आंक रही है इसकी मुख्य वजह यह भी बतायी जा रही है कि रूहेला कग्रेसी माईंन्ड है अयोध्या दंगे में संघ कार्यकर्ताओ की गिरफ़्तारी में अहम भूमिका निभायी थी जिससे यह साफ हो चला है कि भाजपा जाट प्रत्याशी के रूप में चोधरी पूरन सिंह एडवोकेट को लेकर कुछ ज्यादा गंभीर बतायी  जा रही है सूत्रों की माने तो मथुरा सीट पर भाजपा वैश्य प्रत्याशी के भरोसे मथुरा में खोया जनाधार वापस लाने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है 
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शनिवार, 28 अप्रैल 2012

               फेसबुक से विधायक नदारत.......?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के स्वागत में लगे काग्रेस के लोगो को, पाकिस्तान परस्त कटुए जैसा एक भड़काऊ समाचार मथुरा जनपद के एक विधायक को फेसबुक पर टैग करना महगा पड़ गया है इसे देखकर कुछ बुध्दजीवी वर्ग ने आपत्ति युक्त कमेन्ट भी किया अब उक्त विधायक की खूब छिछर लेदा हो रही है जो विधायक फेसबुक पर छाया रहता था, अब आठ रोज से फेसबुक से नदारत है इसे लेकर मुस्लिम समुदाय में विधायक के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त है  
                                                                                             नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
                                                                                    http.//www.samaysapeksh.com

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

            उम्मीद तो है 
इस  नई सुबह की आहट से,
क्या  रात  का जादू टूटेगा,
 क्या वक्त निंगू हो जाएगा,
 होंटो से  तरन्नुम  फूटेगा,
 उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

ये बात सयाने कहते है,
हर खव्वाब की मंजिल होती  है,
 नारगिस भी इक दिन हंसती  है,
 हर आंसू  बनता  मोती है,
 एक गीत जर्मी से उठता है,
 आवाज  फलक तक जाती है,
 जब मह -मह मेह बरसता है,
हर शाख हरी हो जाती है,
मोसम तो आते रहते है,
क्या ऐसी रुत भी आयेगी,
जब धरती छम-छम नाचेगी,
दुख दर्द कजा ले जाएगी,
उम्मीद तो है, उम्मीद तो है,

जब प्यास बड़ी हो जाती है,
पत्थर भी पिघलने  लगते है,
जंजीर खनकने लगती है,
अरमान मचलने लगती है ,
मै अहले -खिरद से पूछ,रहा 
रूपोश हकीकत कितने दिन,
लुटते-पिटते जीते -मरते,
आवाम की हालत कितने दिन,
तुम कहते हो इतनी सारी,
उम्मीदे करना ठीक नहीं,
सच ये भी है जो मांग रहे,
वो अपना हक है भीख नहीं,
ये तुमको जेब नहीं देता,
ऐसे मै तुम खामोस रहो,
क्यों बैठे हो मेरे साथ कहों,
उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

शिवकुमार अर्चन 














  

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