नववर्ष की शुभकामनाएँ
शुक्रवार, 4 जनवरी 2013
शनिवार, 3 नवंबर 2012
फेसबुक पर पहचान छुपाकर महिला मित्र दुश्मन तो हो सकती है मित्र नहीं...?
हाल ही में 22 साल का संदीप खरात ( बदला हुआ नाम ) फेसबुक पर एक लड़की के मकडजाल का शिकार हो गया उक्त समाचार हमारे फेसबुक मित्र राज कमल जी से प्राप्त हुआ बहुत वेदना हुई रुबीना नमक लड़की ने अपने जाल में फसा होटल में मिलने के बहाने अपने सहयोगी लडको को बुलाकर लूट लिया जिसकी सूचना संदीप ने लखनऊ के देवनार इलाके में पुलिस को दी है।ये कोई पहला हादसा नहीं इससे पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके है , हो रहे है और होते रहेगे, जब तक कि फेसबुक चलाने वाले स्यम सजग न होगे, ऐसी लडकियों की आई डी में सिर्फ लडको की भरमार रहती है, वो दोस्ती करने के बाद अपना मोबाईल नंबर भी आसानी से दे देती है ये एक बहुत बड़ा रेकेड है जिसे युवा वर्ग समझ नहीं पा रहा है, ये दोस्ती के नाम पर जान की दुश्मन भी हो सकती है, इनके नंबर और आई डी भी अमुक समय माँ बदल जाते है, इनके मकडजाल से बचने का एक ही इलाज है, जिनकी पहचान सही नहीं है , फोटो नहीं लगा है, उनको अपनी आई डी से तुरंत हटा दे।वर्ना आप किसी भी बड़ी मुसीबत में फस सकते है ये कोल गर्ल भी हो सकती है , आतंकवादियों की चाल भी हो सकती है, अपनी पहचान छुपाकर दोती करने वालो से सावधान रहे ये किसी के दुश्मन तो हो सकते है दोस्त नहीं......?
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शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
गाँधी का जाया है जी.........?
आजकल कुछ हमारे मीडिया के साथी कांग्रेस के मुनेदारो को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान है और वैसे भी हमारे पत्रकार साथी अन्ना आन्दोलन की चाटुकारता प्रणाली को अभी शायद भुला नहीं पाये है।
मै अपने साथियों की कलम की ओजिस्वता को बड़े ही ध्यान से पड़ता हूँ , अच्छा भी लगता है कम से कम फेसबुक पर इनकी धारदार लेखनी से हमारे फेसबुक पाठक (मित्र) लाभान्तित तो हो रहे है।
में लगभग एक माह से लिखने की चेष्ठा कर रहा था पर एक तो कुछ परेशानी कुछ काम- काज का बोझ लिख नहीं पा रहा था, पर आज एक अपने बड़े भाई और लेखनी के धुरन्दर एव सच्चे सिपाही की कलम ने आज लिखने का मन बना दिया, और आज में अपने को कुछ परेशानियों से दूर कुछ हल्का भी महसूस कर रहा हूँ ,
हमारे उक्त साथी ने लिखा है कि आज कल गली-गली में कांग्रेस के होर्डिग लगाये गये है जिन पर लिखा है कि दिल्ली चलो संबोधन सोनिया गाँधी , राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह करेगे।
आगे हमारे साथी ने ये भी लिखा है कि में समझ नहीं पा रहा हूँ ये बोलेगे क्या और कैसे बोलेगे, हमारे भाई की बात भी सत्य है कि सोनिया जी हिंदी जानती ही नहीं है, मनमोहन मैडम के हिसाब से बोलेगे तो राहुल तो अभी मुन्ना है,
सोनिया गाँधी टूटी हिंदी बोलती है पर अच्छा बोलती है, पर राहुल गाँधी के बारे में सुनकर कुछ अजीब लगा क्योकि हमारे ब्रज ( मथुरा ) में एक कहावत है, '' चूहे का जाया बिल ही खोदता है घास नहीं '' अगर में कुछ गलत बोल रहा हूँ तो गलती के लिए क्षमा चाहुगा।
नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी
आज कल गली गली में होर्डिंग लगाए है कांग्रेस ने...
दिल्ली चलो........संबोधन सोनिया गाँधी ,राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह...मुझे तो ये समझ में नहीं आया की ये बोलेंगे क्या और कैसे बोलेंगे ??
सोनिया इंग्लिश पढ़ कर हिंदी बोलेगी...
मनमोहन मैडम के हिसाब से समाचार पढेंगे,,,
और राहुल,,,,,बेचारा मुन्ना...क्या बोलेगा बुढ़ापे में ??
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012
रविवार, 9 सितंबर 2012
बचाओ-बचाओ.....कोई तो मुझे....बचाओ.......?
बन्दरों के आतंक से हर कोई परेशान,शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम,संत रमेश बाबा से उम्मीद
मथुरा। ये बचाओ-बचाओ की आवाजे और चित्कार है एक ऐसे शख्श की जो रात्रि के दो बजे अपने-आपको लगभग 250 बन्दरों से घिरा देख बर्बस ही चिल्ला पड़ा।इससे आप अनुमान लगा सकते है की मथुरा में बन्दरों का आतंक किस कदर बढता जा रहा है, पर अपंग शासन प्रशासन को आज तक निजात दिलाना तो दूर सोचने तक की फुर्सत नहीं है।
करीब 2 बजे चम्पा अग्रवाल इण्टर कालेज के सामने ''कलेक्टर गंज'' से अपनी जान को आफत में फसी देख लगभग 250 बन्दरों से घिरा एक आदमी इतनी जोर से चिल्लाया की आसपास ही नहीं दूर-दराज तक के लोग जाग गये इसकी चीख से कलेक्टर गंज ही नहीं वरन गुजरना गली, नगला पाईसा, लालगंज, शीतला पाईसा, आदि क्षेत्र के लोग यह समझकर अपनी छतो की तरफ दोड़े की कही किसी ने लूटपाट तो नहीं कर दी पर जब देखा तो माजरा कुछ और ही निकला वो आदमी इधर उधर भाग रहा था और बन्दर उसे खाने को दोड़ रहे थे।
प्रत्यक्ष दर्शियो का कहना है की जब हमने अपनी छतो पर से देखा तो स्पष्ट दिख रहा था कि लगभग 250 बन्दरों ने उसके माकन में उसके चारो तरफ गोलाईनुमा माला के रूप में फैले हुए थे वहा उसे पहुचकर बचाया जाना संभव नहीं था, इसलिए हमने टोर्च लेन का हल्ला कर दिया फिर सभी ने छतो पर से टोर्चे बन्दरों की तरफ दिखाना आरम्भ कर दिया जिसे देख बन्दर भयभीत हो गये और भागने लगे इस तरह उस व्यक्ति की जन बचाई।
स्थानीय नागरिको का कथन है कि उक्त घटना 5 सितम्बर की रत की है, इससे पूर्व हम कई बार लिखित शिकायत भी कर चुके है पर आज तक कुछ भी नहीं हुआ ब्रज के संत रमेश बाबा से लोगो को उम्मीद काफी है शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम है लोगो का कहना है की बरसाना स्थित घैवर वन एक इसी जगह है जो सिर्फ बन्दरो से ही सोभायमान लगती है और ब्रज के बारे में ब्रज के संत रमेश बाबा समय-समय पर ब्रज को बचाने के लिए आन्दोलन भी करते रहे है बन्दर और गायो के प्रति उनकी आस्था भी है।
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गुरुवार, 9 अगस्त 2012
बुधवार, 1 अगस्त 2012
''विधवा'' नगरपालिका, आखिर कब बनेगी ''सधवा''
मथुरा। पहले इस बात को लेकर बहुत हल्ला था आखिर नगरपालिका का होगा क्या आखिर कब होगे चुनाव उक्त प्रतीक्षा तो समाप्त हुई भले ही देर से सही चुनाव तो हो गये, पालिका को मर्द ( वर ) सधवा न बना सका हो, पर एक अच्छी वरवधु ही सही कम से कम नगरपालिका को मुखिया की तलाश तो पूरी हुई अब नगर के लोगो का कहना है ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा''
पुराने ज़माने की मान्यताये आज भी लोग मानते चले आ रहे है पहले जब कोई राजा मर जाता था तो लोग उसका क्रिया कर्म नहीं किया करते थे जब तक किसी के राज तिलक नहीं हो जाता था और मृत राजा को तेल में डाल कर रखा जाता था जब तक किसी को गद्दी पर बिठाकर राजतिलक न कर दिया जाय। नगरपालिका का समय समाप्त होने के बाद कार्यवाहक के रूप में रहे श्यामसुंदर उपाध्याय उर्फ़ विट्टू व्दारा किये कार्यो पर सभी को आपत्ति रही पति होने के बाद भी पालिका ''विधवा'' ही रही चलो दिखावा ही सही उसको तो नगर में हुए चुनावो ने शान्तुना दे दी आस जगी ''सधवा'' होने की।
मथुरा के बहुचर्चित जनरलगंज स्थित नगरपालिका अपनी बद्हास स्थिति में आज भी पलके बिछाये नये मुखिया का इन्तजार कर रही है राजनैतिक खीचतान के चलते पर्शिमन सुरक्षित महिला सामान्य आदि माथापच्ची तमाम नाटको पर महिला सीट के नाम पर विराम लगा कोई ऐसा मर्द न मिला जो पालिका की नाक में नथेल डालकर अपने वश में कर सके।
कुल मिलाकर नगरपालिका को ना तो बांकेबिहारी महेश्वरी जैसा ''बाबूजी'' ही मिला ना ही तेजतर्रार वीरेन्द्र अग्रवाल जैसा ''नगर पिता'' ही मिला बहराल ''नगरवधू'' ही सही पर ''कानी के व्याह को नौ सौ योग'' वाली कहावत खूब चरितार्थ हो रही है, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष श्रीमती मनीषा गुप्ता भारी बहुमत से विजयी तो हो गयी पर अभी तक शपथ ग्रहण समारोह में लेट लतीफी से जहा वार्डों से चुने सभासदों में बेचेनी है वही नगर की जनता जो अपनी नयी चेयरमैन की जल्द ताजपोशी देखना चाहते है और खास कर वो जो भाजपा के चुनाव प्रचार में साथ रहकर बे-मन से प्रचार तो किया पर अन्दर खाने मनीषा गुप्ता की हार का इन्तजार करते रहे जब परिणाम आया तो उनके सपने काफूर हो गये चुनाव लड़ कर मनीषा ने ऐसा कोन सा गुनाह कर दिया कि अपने भी दूर हो गये। हमे अपने फेसबुक के मित्र अजित जोगी वो पंक्तिया याद आती है।
तन्हाइयो के ख्वाब चूर चूर हो गये,
जो पल सुकून के थे वो काफूर हो गये,
अपने लिए है वक्त,ना अपनों के लिए है,
मशुहूर क्या हुए है,खुद से दूर हो गये
नगर की जनता में उत्सुकता इस बात को लेकर है कि ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा'' अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो नवनिर्वाचित पालिका अध्यक्षया श्रीमती मनीषा गुप्ता 7 अगस्त को शपथ ग्रहण करेगी।
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