गुरुवार, 9 अगस्त 2012

विश्व प्रसिद्ध तीनो लोको से निराली कान्हा की नगरी पावन भूमि मथुरा में कन्हैया के दर्शन को
                                                   देश विदेश से आने वाले
                                                               श्रधालुओ 
                                                                    एव 
          समस्त देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्म अष्टमी एव नंद्दोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये 
                                                                                         
                                                            नरेन्द्र एम्. चतुर्वेदी 

बुधवार, 1 अगस्त 2012

''विधवा'' नगरपालिका, आखिर कब बनेगी ''सधवा'' 


मथुरा। पहले इस बात को लेकर बहुत हल्ला था आखिर नगरपालिका का होगा क्या आखिर कब होगे चुनाव उक्त प्रतीक्षा तो समाप्त हुई भले ही देर से सही चुनाव तो हो गये, पालिका को मर्द ( वर ) सधवा न बना सका हो, पर एक अच्छी वरवधु ही सही कम से कम नगरपालिका को मुखिया की तलाश तो पूरी हुई अब नगर के लोगो का कहना है ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा''
       पुराने ज़माने की मान्यताये आज भी लोग मानते चले आ रहे है पहले जब कोई राजा मर जाता था तो लोग उसका क्रिया कर्म नहीं किया करते थे जब तक किसी के राज तिलक नहीं हो जाता था और मृत राजा को तेल में डाल कर रखा जाता था जब तक किसी को गद्दी पर बिठाकर राजतिलक न कर दिया जाय। नगरपालिका का समय समाप्त होने के बाद कार्यवाहक के रूप में रहे श्यामसुंदर उपाध्याय उर्फ़ विट्टू व्दारा किये कार्यो पर सभी को आपत्ति रही पति होने के बाद भी पालिका ''विधवा'' ही रही चलो दिखावा ही सही उसको तो नगर में हुए चुनावो ने शान्तुना दे दी आस जगी ''सधवा'' होने की।
      मथुरा के बहुचर्चित जनरलगंज स्थित नगरपालिका अपनी बद्हास स्थिति में आज भी पलके बिछाये नये मुखिया का इन्तजार कर रही है राजनैतिक खीचतान के चलते पर्शिमन सुरक्षित महिला सामान्य आदि माथापच्ची तमाम नाटको पर महिला सीट के नाम पर विराम लगा कोई ऐसा मर्द न मिला जो पालिका की नाक में नथेल डालकर अपने वश में कर सके।
        कुल मिलाकर नगरपालिका को ना तो बांकेबिहारी महेश्वरी जैसा ''बाबूजी'' ही मिला ना ही तेजतर्रार वीरेन्द्र अग्रवाल जैसा ''नगर पिता'' ही मिला बहराल ''नगरवधू'' ही सही पर ''कानी के व्याह को नौ सौ योग'' वाली कहावत खूब चरितार्थ हो रही है, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष श्रीमती मनीषा गुप्ता भारी बहुमत से विजयी तो हो गयी पर अभी तक शपथ ग्रहण समारोह में लेट लतीफी से जहा वार्डों से चुने सभासदों में बेचेनी है वही नगर की जनता जो अपनी नयी चेयरमैन की जल्द ताजपोशी देखना चाहते है और खास कर वो जो भाजपा के चुनाव प्रचार में साथ रहकर बे-मन से प्रचार तो किया पर अन्दर खाने मनीषा गुप्ता की हार का इन्तजार करते रहे जब परिणाम आया तो उनके सपने काफूर हो गये चुनाव लड़ कर मनीषा ने ऐसा कोन सा गुनाह कर दिया कि अपने भी दूर हो गये। हमे अपने फेसबुक के मित्र अजित जोगी वो पंक्तिया याद आती है।
                 तन्हाइयो के ख्वाब चूर चूर हो गये,
               जो पल सुकून के थे वो काफूर हो गये,
              अपने लिए है वक्त,ना अपनों के लिए है,
                 मशुहूर क्या हुए है,खुद से दूर हो गये 
नगर की जनता में उत्सुकता इस बात को लेकर है कि ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा'' अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो नवनिर्वाचित पालिका अध्यक्षया श्रीमती मनीषा गुप्ता 7 अगस्त को शपथ ग्रहण करेगी।
                        http://blogger.samaysapeksh.com 

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