रविवार, 9 सितंबर 2012

 बचाओ-बचाओ.....कोई तो मुझे....बचाओ.......?

बन्दरों के आतंक से हर कोई परेशान,शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम,संत रमेश बाबा से उम्मीद

मथुरा। ये बचाओ-बचाओ की आवाजे और चित्कार है एक ऐसे शख्श की जो रात्रि के दो बजे अपने-आपको लगभग 250 बन्दरों से घिरा देख बर्बस ही चिल्ला पड़ा।इससे आप अनुमान लगा सकते है की मथुरा में बन्दरों का आतंक किस कदर बढता जा रहा है, पर अपंग शासन प्रशासन को आज तक निजात दिलाना तो दूर सोचने तक की फुर्सत नहीं है।
      करीब 2 बजे चम्पा अग्रवाल इण्टर कालेज के सामने ''कलेक्टर गंज'' से अपनी जान को आफत में फसी देख लगभग 250 बन्दरों से घिरा एक आदमी इतनी जोर से चिल्लाया की आसपास ही नहीं दूर-दराज तक के लोग जाग गये इसकी चीख से कलेक्टर गंज ही नहीं वरन गुजरना गली, नगला पाईसा, लालगंज, शीतला पाईसा, आदि क्षेत्र के लोग यह समझकर अपनी छतो की तरफ दोड़े की कही किसी ने लूटपाट तो नहीं कर दी पर जब देखा तो माजरा कुछ और ही निकला वो आदमी इधर उधर भाग रहा था और बन्दर उसे खाने को दोड़ रहे थे।
        प्रत्यक्ष दर्शियो का कहना है की जब हमने अपनी छतो पर से देखा तो स्पष्ट दिख रहा था कि लगभग 250 बन्दरों ने उसके माकन में उसके चारो तरफ गोलाईनुमा माला के रूप में फैले हुए थे वहा उसे पहुचकर बचाया जाना संभव नहीं था, इसलिए हमने टोर्च लेन का हल्ला कर दिया फिर सभी ने छतो पर से टोर्चे बन्दरों की तरफ दिखाना आरम्भ कर दिया जिसे देख बन्दर भयभीत हो गये और भागने लगे इस तरह उस व्यक्ति की जन बचाई।
          स्थानीय नागरिको का कथन है कि उक्त घटना 5 सितम्बर की रत की है, इससे पूर्व हम कई बार लिखित शिकायत भी कर चुके है पर आज तक कुछ भी नहीं हुआ ब्रज के संत रमेश बाबा से लोगो को उम्मीद काफी है शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम है लोगो का कहना है की बरसाना स्थित घैवर वन एक इसी जगह है जो सिर्फ बन्दरो से ही सोभायमान लगती है और ब्रज के बारे में ब्रज के संत रमेश बाबा समय-समय पर ब्रज को बचाने के लिए आन्दोलन भी करते रहे है बन्दर और गायो के प्रति उनकी आस्था भी है। 
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