शनिवार, 28 अप्रैल 2012

               फेसबुक से विधायक नदारत.......?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के स्वागत में लगे काग्रेस के लोगो को, पाकिस्तान परस्त कटुए जैसा एक भड़काऊ समाचार मथुरा जनपद के एक विधायक को फेसबुक पर टैग करना महगा पड़ गया है इसे देखकर कुछ बुध्दजीवी वर्ग ने आपत्ति युक्त कमेन्ट भी किया अब उक्त विधायक की खूब छिछर लेदा हो रही है जो विधायक फेसबुक पर छाया रहता था, अब आठ रोज से फेसबुक से नदारत है इसे लेकर मुस्लिम समुदाय में विधायक के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त है  
                                                                                             नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
                                                                                    http.//www.samaysapeksh.com

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

            उम्मीद तो है 
इस  नई सुबह की आहट से,
क्या  रात  का जादू टूटेगा,
 क्या वक्त निंगू हो जाएगा,
 होंटो से  तरन्नुम  फूटेगा,
 उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

ये बात सयाने कहते है,
हर खव्वाब की मंजिल होती  है,
 नारगिस भी इक दिन हंसती  है,
 हर आंसू  बनता  मोती है,
 एक गीत जर्मी से उठता है,
 आवाज  फलक तक जाती है,
 जब मह -मह मेह बरसता है,
हर शाख हरी हो जाती है,
मोसम तो आते रहते है,
क्या ऐसी रुत भी आयेगी,
जब धरती छम-छम नाचेगी,
दुख दर्द कजा ले जाएगी,
उम्मीद तो है, उम्मीद तो है,

जब प्यास बड़ी हो जाती है,
पत्थर भी पिघलने  लगते है,
जंजीर खनकने लगती है,
अरमान मचलने लगती है ,
मै अहले -खिरद से पूछ,रहा 
रूपोश हकीकत कितने दिन,
लुटते-पिटते जीते -मरते,
आवाम की हालत कितने दिन,
तुम कहते हो इतनी सारी,
उम्मीदे करना ठीक नहीं,
सच ये भी है जो मांग रहे,
वो अपना हक है भीख नहीं,
ये तुमको जेब नहीं देता,
ऐसे मै तुम खामोस रहो,
क्यों बैठे हो मेरे साथ कहों,
उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

शिवकुमार अर्चन 














  

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

                      काग्रेस  कार्यकर्ताओ का दर्द 
               विधायक से छुव्ध जमीनी कार्यकर्त्ता 

मथुरा। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में काग्रेस प्रत्याशी को अल्प मतों से मिली विजय का श्रेय मात्र स्यम अपने विकास कार्यो की वजह मानने से जमीनी कार्यकर्त्ता छुव्ध है हकीकत यह है कि आम जमीनी कार्यकर्त्ता अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है क्योकि काग्रेस पार्टी के सगठन में अपनी वजूद न होते हुए भी अपने को कार्यकर्त्ता मान कार्य किया ऐसा कोई बूथ नहीं जिस पर काग्रेस को वोट न पड़ा हो जबकि उन जगह प्रदीप माथुर के विकास १० वर्षो में शून्य है।
कार्यकर्ताओ का कहना है कि विधायक काग्रेस को अपनी जागीर समझने लगे है। सेवादल जैसे अग्रिम संघठन के अध्यक्ष व प्रदेश पदाधिकारी जहाँ विधायक की गैस एजेंशी के कर्मचारी है। दूसरी ओर विधायक के साथ व काग्रेस के कार्यक्रमों में भी एकाधिकार रखते है जिससे जमीन से जुड़े कार्यकर्त्ता अपनी वेदना किसी से कह भी नहीं सकते २१ अप्रेल को लखनऊ में हाईकमान को समीक्षा बैठक में रिपोर्ट जानी है वह झूठी व भ्रामक अखबारी होनी है।
           वही हाल शहर कमेटी का है जो की अधक्ष बनने के उपरांत भी आज तक अपनी कार्यकारणी घोषित नहीं कर पाये चमचो का कल भी बोलबाला था और आज भी बोलबाला है कई तो ऐसे जमीनी कार्यकर्त्ता है जो अपना सब कुछ लुटा कर भुखमरी व बेरोजगारी के कगार पर है विधायक यदि असलियत से वाखिफ होना चाहते है तो जमीनी कर्कर्ताओ के हाल चाल व उनके छेत्र में भ्रमण कर आत्मीयता दिखाये वर्ना आम जमीनी कार्यकर्त्ता शान्त न बैठ कर अपने हक़ के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है 
                                                                                   hppt.//www.samaysapeksh.com 

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

     देवी माँ का विशाल जागरण खारन की घटिया पर आज 
मथुरा। कोतवाली रोड स्थित महोली की पोर खारन की घटिया पर युवा मित्र मण्डली 
व्दारा प्रथम देवी माँ का विशाल जागरण का आयोजन आज रात आठ बजे से किया जा रहा है।
आयोजको व्दारा मथुरा की धर्म परायण जनता से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
                                                                                          http.//www.samaysapeksh.com

रविवार, 18 मार्च 2012

            चोकने वाला फैसला जयंत का 22 को......? 


मथुरा । लोकदल से मांट के विधायक जयंत फैसला लेने में देरी का कारण विचारो और राजनितग्यो की राय जानने में जुटे है । 22 मार्च को महत्वपूर्ण फैसला लेने की बात कही है बुद्जीवी वर्ग का मानना है कि यदि जयंत विधायक पद से इस्तीफा देते है तो राजनैतिक हत्या होगी और संसाद पद से इस्तीफा सिर्फ दो वर्ष का वनवास हो सकता है । इस असमंजस की घडी में आख़िरकार जयंत क्या नया गुल खिलाते है ये भी फैसला राजनैतिक गलियारों में चोकने वाला होगा ।
                                                                                                      नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
                                                                                            http.//www.samaysapeksh.com

मंगलवार, 28 फरवरी 2012

                      एक प्रत्याशी का दर्द, और जनता की सहानुभूति  
डा.अशोक अग्रवाल का छह वर्ष बसपा में वनवास ख़त्म हुआ और सपा ने आंसू भी पोछ दिये, अब जनता की भी सहानुभूति लाजमीय है सर्व समाज की सहनुभूति भी काविले तारीफ रही उम्मीद के मुताविक वोटो का प्रतिशत कम होना शुभ संकेत है, पर इस धुरी में भाजपा से प्रत्याशी रहे डा.देवेन्द्र कुमार शर्मा मतदान के आधार पर डा. अशोक के लिए सिरदर्द जरुर है ।
आज से छह वर्ष पूर्व बसपा पार्टी ने डा.अशोक अग्रवाल को एक ताकत के रूप में पार्टी में शामिल किया और मथुरा-वृन्दावन विधान सभा छेत्र से वादे के मुताविक टिकट भी दिया और बिना पूछे टिकट काट कर प.देवेन्द्र गोतम को दे दिया इस दंश को झेला और पार्टी के फैसले को स्वीकार भी किया । पार्टी के लिए पांच वर्ष निस्वार्थ कार्य भी किया फिर एक बार बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा इस बार भी डा.अशोक से काट कर वृन्दावन की चेयरमैन पुष्पा शर्मा को दे देने से डा.अशोक आहत हो उठे और समाजवादी का दामन थाम लिया । अब जनता ने डा.अशोक अग्रवाल के साथ कितनी सहानुभूति निभायी ये तो वक्त ही बतायेगा- आमीन    
                            कुर्सी की चाह में हम छह वर्ष तक रोते रहे,
                               बेवफा वो निकले बदनाम हम होते रहे,
                              कुर्सी की मदहोशी का आलम तो देखिये,
                             धूल चेहरे पर थी और आईना हम धोते रहे, 
                                                                                      नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी
                                                                            http.//www.samaysapeksh.com

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