बुधवार, 13 मार्च 2013

अब पछताये क्या होत है, जब चिड़िया चुंग गयी खेत ? यमुना मुक्ति पदयात्रा आन्दोलन की हवा तो प्रस्तावित कार्यक्रम से दो दिन पहले ही निकल गयी थी या यू समझो कि मथुरा बृन्दावन के एक  नामचीन चमचे  ने हवा निकालने में अच्छी भूमिका अदा की थी, क्या जरुरत थी आन्दोलन से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँघी से मिलने की , क्या जरुरत थी अपने को हीरो शो करने के लिये अख़बार में फोटो छपवाने की, जब सोनिया जी से मिल ही आये उन्होंने भरोसा दिला दिया तो फिर क्या महत्वता रह गयी आन्दोलन की, क्या ओचित्त रह गया। 
वही मीडिया ने एक चेहरे को इतना छापा की जनपद की सीमा के बहार की उसे भी अपनी ताकत का एहसास हो गया। केंद्र सरकार से ब्रज की जनता को तो झुनझुना ही मिला है, पर दलालों की नजर तो अब भी जल संचय हेतु मिलने वाले दो सो करोड़ पर ही द्रष्टि है। 

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

नववर्ष की शुभकामनाएँ 

शनिवार, 3 नवंबर 2012

फेसबुक पर पहचान छुपाकर महिला मित्र दुश्मन तो हो सकती है मित्र नहीं...?

हाल ही में 22 साल का संदीप खरात ( बदला हुआ नाम ) फेसबुक पर एक लड़की के मकडजाल का शिकार हो गया उक्त समाचार हमारे फेसबुक मित्र राज कमल जी से प्राप्त हुआ बहुत वेदना हुई रुबीना नमक लड़की ने अपने जाल में फसा होटल में मिलने के बहाने अपने सहयोगी लडको को बुलाकर लूट  लिया जिसकी सूचना संदीप ने लखनऊ के देवनार इलाके में पुलिस को दी है।
                  ये कोई पहला हादसा नहीं इससे पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके है , हो रहे है और होते रहेगे, जब तक कि फेसबुक चलाने वाले स्यम सजग न होगे, ऐसी लडकियों की आई डी में सिर्फ लडको की भरमार रहती है, वो दोस्ती करने के बाद अपना मोबाईल नंबर भी आसानी से दे देती है ये एक बहुत बड़ा रेकेड है जिसे युवा वर्ग समझ नहीं पा रहा है, ये दोस्ती के नाम पर जान की दुश्मन भी हो सकती है, इनके नंबर और आई डी भी अमुक समय माँ बदल जाते है, इनके मकडजाल से बचने का एक ही इलाज है, जिनकी पहचान सही नहीं है , फोटो नहीं लगा है, उनको अपनी आई डी से तुरंत हटा दे।वर्ना आप किसी भी बड़ी मुसीबत में फस सकते है ये कोल गर्ल भी हो सकती है , आतंकवादियों की चाल भी हो सकती है, अपनी पहचान छुपाकर दोती करने वालो से सावधान रहे ये किसी के दुश्मन तो हो सकते है दोस्त नहीं......? 
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शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

गाँधी का जाया है जी.........?

आजकल कुछ हमारे मीडिया के साथी कांग्रेस के मुनेदारो को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान है और वैसे भी हमारे पत्रकार साथी अन्ना आन्दोलन की चाटुकारता प्रणाली को अभी शायद भुला नहीं पाये है।
     मै अपने साथियों की कलम की ओजिस्वता को बड़े ही ध्यान से पड़ता हूँ , अच्छा भी लगता है कम से कम फेसबुक पर इनकी धारदार लेखनी से हमारे फेसबुक पाठक (मित्र) लाभान्तित तो हो रहे है।
में लगभग एक माह से लिखने की चेष्ठा कर रहा था पर एक तो कुछ परेशानी कुछ काम- काज का बोझ लिख नहीं पा रहा था, पर आज एक अपने बड़े भाई और लेखनी के धुरन्दर एव सच्चे सिपाही की कलम ने आज लिखने का मन बना दिया, और आज में अपने को कुछ परेशानियों से दूर कुछ हल्का भी महसूस कर रहा हूँ ,
हमारे उक्त साथी ने लिखा है कि आज कल गली-गली में कांग्रेस के होर्डिग लगाये गये है जिन पर लिखा है कि दिल्ली चलो संबोधन सोनिया गाँधी , राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह करेगे। 
    आगे हमारे साथी ने ये भी लिखा है कि में समझ नहीं पा रहा हूँ ये बोलेगे क्या और कैसे बोलेगे, हमारे भाई की बात भी सत्य है कि सोनिया जी हिंदी जानती ही नहीं है, मनमोहन मैडम के हिसाब से बोलेगे तो राहुल तो अभी मुन्ना है,
सोनिया गाँधी टूटी हिंदी बोलती है पर अच्छा बोलती है, पर राहुल गाँधी के बारे में सुनकर कुछ अजीब लगा क्योकि हमारे ब्रज ( मथुरा ) में एक कहावत है, '' चूहे का जाया बिल ही खोदता है घास नहीं '' अगर में कुछ गलत बोल रहा हूँ तो गलती के लिए क्षमा चाहुगा।  

                                                  नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी        






आज कल गली गली में होर्डिंग लगाए है कांग्रेस ने...
दिल्ली चलो........संबोधन सोनिया गाँधी ,राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह...
मुझे तो ये समझ में नहीं आया की ये बोलेंगे क्या और कैसे बोलेंगे ??
सोनिया इंग्लिश पढ़ कर हिंदी बोलेगी...
मनमोहन मैडम के हिसाब से समाचार पढेंगे,,,
और राहुल,,,,,बेचारा मुन्ना...क्या बोलेगा बुढ़ापे में ??

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

समस्त भारतवासियों को समय सापेक्ष परिवार की ओर से
                नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये 

रविवार, 9 सितंबर 2012

 बचाओ-बचाओ.....कोई तो मुझे....बचाओ.......?

बन्दरों के आतंक से हर कोई परेशान,शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम,संत रमेश बाबा से उम्मीद

मथुरा। ये बचाओ-बचाओ की आवाजे और चित्कार है एक ऐसे शख्श की जो रात्रि के दो बजे अपने-आपको लगभग 250 बन्दरों से घिरा देख बर्बस ही चिल्ला पड़ा।इससे आप अनुमान लगा सकते है की मथुरा में बन्दरों का आतंक किस कदर बढता जा रहा है, पर अपंग शासन प्रशासन को आज तक निजात दिलाना तो दूर सोचने तक की फुर्सत नहीं है।
      करीब 2 बजे चम्पा अग्रवाल इण्टर कालेज के सामने ''कलेक्टर गंज'' से अपनी जान को आफत में फसी देख लगभग 250 बन्दरों से घिरा एक आदमी इतनी जोर से चिल्लाया की आसपास ही नहीं दूर-दराज तक के लोग जाग गये इसकी चीख से कलेक्टर गंज ही नहीं वरन गुजरना गली, नगला पाईसा, लालगंज, शीतला पाईसा, आदि क्षेत्र के लोग यह समझकर अपनी छतो की तरफ दोड़े की कही किसी ने लूटपाट तो नहीं कर दी पर जब देखा तो माजरा कुछ और ही निकला वो आदमी इधर उधर भाग रहा था और बन्दर उसे खाने को दोड़ रहे थे।
        प्रत्यक्ष दर्शियो का कहना है की जब हमने अपनी छतो पर से देखा तो स्पष्ट दिख रहा था कि लगभग 250 बन्दरों ने उसके माकन में उसके चारो तरफ गोलाईनुमा माला के रूप में फैले हुए थे वहा उसे पहुचकर बचाया जाना संभव नहीं था, इसलिए हमने टोर्च लेन का हल्ला कर दिया फिर सभी ने छतो पर से टोर्चे बन्दरों की तरफ दिखाना आरम्भ कर दिया जिसे देख बन्दर भयभीत हो गये और भागने लगे इस तरह उस व्यक्ति की जन बचाई।
          स्थानीय नागरिको का कथन है कि उक्त घटना 5 सितम्बर की रत की है, इससे पूर्व हम कई बार लिखित शिकायत भी कर चुके है पर आज तक कुछ भी नहीं हुआ ब्रज के संत रमेश बाबा से लोगो को उम्मीद काफी है शासन-प्रशासन से उम्मीदे कम है लोगो का कहना है की बरसाना स्थित घैवर वन एक इसी जगह है जो सिर्फ बन्दरो से ही सोभायमान लगती है और ब्रज के बारे में ब्रज के संत रमेश बाबा समय-समय पर ब्रज को बचाने के लिए आन्दोलन भी करते रहे है बन्दर और गायो के प्रति उनकी आस्था भी है। 
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गुरुवार, 9 अगस्त 2012

विश्व प्रसिद्ध तीनो लोको से निराली कान्हा की नगरी पावन भूमि मथुरा में कन्हैया के दर्शन को
                                                   देश विदेश से आने वाले
                                                               श्रधालुओ 
                                                                    एव 
          समस्त देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्म अष्टमी एव नंद्दोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये 
                                                                                         
                                                            नरेन्द्र एम्. चतुर्वेदी 

बुधवार, 1 अगस्त 2012

''विधवा'' नगरपालिका, आखिर कब बनेगी ''सधवा'' 


मथुरा। पहले इस बात को लेकर बहुत हल्ला था आखिर नगरपालिका का होगा क्या आखिर कब होगे चुनाव उक्त प्रतीक्षा तो समाप्त हुई भले ही देर से सही चुनाव तो हो गये, पालिका को मर्द ( वर ) सधवा न बना सका हो, पर एक अच्छी वरवधु ही सही कम से कम नगरपालिका को मुखिया की तलाश तो पूरी हुई अब नगर के लोगो का कहना है ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा''
       पुराने ज़माने की मान्यताये आज भी लोग मानते चले आ रहे है पहले जब कोई राजा मर जाता था तो लोग उसका क्रिया कर्म नहीं किया करते थे जब तक किसी के राज तिलक नहीं हो जाता था और मृत राजा को तेल में डाल कर रखा जाता था जब तक किसी को गद्दी पर बिठाकर राजतिलक न कर दिया जाय। नगरपालिका का समय समाप्त होने के बाद कार्यवाहक के रूप में रहे श्यामसुंदर उपाध्याय उर्फ़ विट्टू व्दारा किये कार्यो पर सभी को आपत्ति रही पति होने के बाद भी पालिका ''विधवा'' ही रही चलो दिखावा ही सही उसको तो नगर में हुए चुनावो ने शान्तुना दे दी आस जगी ''सधवा'' होने की।
      मथुरा के बहुचर्चित जनरलगंज स्थित नगरपालिका अपनी बद्हास स्थिति में आज भी पलके बिछाये नये मुखिया का इन्तजार कर रही है राजनैतिक खीचतान के चलते पर्शिमन सुरक्षित महिला सामान्य आदि माथापच्ची तमाम नाटको पर महिला सीट के नाम पर विराम लगा कोई ऐसा मर्द न मिला जो पालिका की नाक में नथेल डालकर अपने वश में कर सके।
        कुल मिलाकर नगरपालिका को ना तो बांकेबिहारी महेश्वरी जैसा ''बाबूजी'' ही मिला ना ही तेजतर्रार वीरेन्द्र अग्रवाल जैसा ''नगर पिता'' ही मिला बहराल ''नगरवधू'' ही सही पर ''कानी के व्याह को नौ सौ योग'' वाली कहावत खूब चरितार्थ हो रही है, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष श्रीमती मनीषा गुप्ता भारी बहुमत से विजयी तो हो गयी पर अभी तक शपथ ग्रहण समारोह में लेट लतीफी से जहा वार्डों से चुने सभासदों में बेचेनी है वही नगर की जनता जो अपनी नयी चेयरमैन की जल्द ताजपोशी देखना चाहते है और खास कर वो जो भाजपा के चुनाव प्रचार में साथ रहकर बे-मन से प्रचार तो किया पर अन्दर खाने मनीषा गुप्ता की हार का इन्तजार करते रहे जब परिणाम आया तो उनके सपने काफूर हो गये चुनाव लड़ कर मनीषा ने ऐसा कोन सा गुनाह कर दिया कि अपने भी दूर हो गये। हमे अपने फेसबुक के मित्र अजित जोगी वो पंक्तिया याद आती है।
                 तन्हाइयो के ख्वाब चूर चूर हो गये,
               जो पल सुकून के थे वो काफूर हो गये,
              अपने लिए है वक्त,ना अपनों के लिए है,
                 मशुहूर क्या हुए है,खुद से दूर हो गये 
नगर की जनता में उत्सुकता इस बात को लेकर है कि ''विधवा'' नगरपालिका आखिर कब बनेगी ''सधवा'' अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो नवनिर्वाचित पालिका अध्यक्षया श्रीमती मनीषा गुप्ता 7 अगस्त को शपथ ग्रहण करेगी।
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सोमवार, 23 जुलाई 2012

मथुरा के निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 जुलाई को कल


आज तक सब प्रत्याशी फुल स्टॉप,कल चन्द रहेगे नान स्टॉप 


मथुरा। मथुरा जनपद में निकाय चुनावो की सरगर्मी अभी थमने का नाम नहीं ले रही अध्यक्ष व सभासद पद हेतु लगभग 1100 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है जो चुनाव प्रचार की अंतिम तिथि 18 तक अपनी जीत के सारे अठ्ठे पंजे लड़ा चुके है 20 को वोट पड़ने से पहले 19 की रात तक प्रत्याशियों ने जमकर मतदाताओ को लुभाने की खातिर चुनाव आयोग के कायदे कानून की धज्जीया उड़ाते हुए धन वर्षा के साथ खूब शराब बाटी किसी ने घेवर बाटे किसी ने इनव्टर लगवाये किसी ने बैण्ड बजवाया तो किसी ने नोटंकी गव्वायी यही वजह है कि कोई भी प्रत्याशी अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है, सभी अपनी जीत के प्रति अस्वस्थ नजर आ रहे है।
      अब प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 जुलाई को कल देर साय तक होगा इनके भाग्य अभी मतपेटिका में बन्द है हर प्रत्याशी की नीद भूख उड़ी हुई है पर अपने को जीता हुआ बता रहे है नगर सीट पर भाजपा प्रत्याशी मनीषा गुप्ता और सपा समर्पित लता अग्रवाल को ही फाइट में माना जा रहा है ऐसा आंकलन शहर के सटोरियों का भी है पर वो भी वैश्य वोटो को लेकर असमंजस की स्थिति में है एक सटोरिया ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की हम ये नहीं समझ पा रहे है कि अधिक वैश्य वोट किसको मिला है जीत उसी की है।
  बहराल कल सबके भाग्य का फैसला होना है...यानि...आज तक सब प्रत्याशी फुल स्टॉप,कल कल चन्द रहेगे नान स्टॉप
          नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
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सोमवार, 16 जुलाई 2012

कांगेस में दो फाड़ से भाजपा की राह आसान

मथुरा। मथुरा कांगेस में निकाय चुनावो में टिकट को लेकर छिड़ी जंग अब सडको पर साफ दिखाई दे रही है कांगेस के वरिष्ठ नेता शिक्षाविद कुलदीप भार्गव ने कांगेस का संबल ना मिलने से कुपित होकर अपनी पत्नी रश्मि भार्गव को निर्दलीय ही मैदान में उतार दिया और कांगेस का बुद्धजीवी तबका रश्मि के खेमे में जा कूदा इधर रश्मि की योग्यता को देखते हुए  बसपा ने भी अपना समर्थन दे डाला जबकि मुस्लिम वोट इस बार सपा समर्पित डा. अशोक अग्रवाल की पत्नी लता को मिल रहा है हाल ही में हुए विधान सभा चुनावो में ब्रह्ममन कार्ड फेल होने से कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना शर्मा को काफी संघर्ष से जूझना पड़ेगा। वही वैश्यों का झुकाव इस वार भाजपा से दो बार नगर अध्यक्ष रहे राजेश गुप्ता की पत्नी मनीषा गुप्ता को अच्छा समर्थन मिलने से मथुरा नगर की जनता का यह मनना है कि भाजपा की होने वाली जीत कांग्रेस के दो फाड़ व विधायक की अकर्मंद्ता का प्रतिफल होगा।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

मथुरा निकाय चुनावो में टिकट वितरण को लेकर   


कांग्रेस में फूटे असन्तोष के स्वर.......


मथुरा। उत्तर प्रदेश में अंतिम चरण में हो रहे निकाय चुनावो में कर्मठ पात्रो को वंचित कर अपात्रों को टिकट देने का मामला अब कांग्रेस पार्टी में तूल पकड़ता जा रहा है एक ग्रहणी महिला प्रत्याशी बनाये जाने कुपित सक्रिय महिलाये स्थानीय स्तर पर बायोडाटा देने के वावजूद टिकट से वंचित रही वही एक ऐसी महिला को टिकट दिया है जो बोलना भी नहीं जानती है नगर पालिका को कैसे चलाएगी यह एक विचारणीय प्रश्न है इससे यह स्पष्ट है की सीट जीतने के बाद इनके पति प्रतनिधि के रूप में पालिका को चलायेगे। इसे लेकर कांगेस कार्यकर्त्तओ में रोष व्याप्त है।
                बताया जाता है कि विधान मंडल दल के नेता व मथुरा-ब्रन्दावन छेत्र के विधायक प्रदीप माथुर एव अब तक रहे मथुरा से नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय उर्फ़ बिट्टू इन दोनों के बीच घमासान वर्चश्व की जंग चली आ रही है इसी के चलते विधायक ने हस्तक्षेप कर बिट्टू की भाभी की टिकट काट कर अपने चहेते एन डी तिवारी कांगेस से पूर्व में पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ टुनटुन भैया की ग्रहणी पत्नी को दिलवाकर वर्चश्व की जंग तो जीत ली अब कुर्सी कैसे जीतेगे इसको लेकर ब्रह्मामन एकता का नारा पुन: लगाया जा रहा है जबकि हालही में हुए विधान सभा के चुनावो में ब्रह्मामन कार्ड पूरी तरह फेल हो चुका है।
      ये तो बात कर रहे थे कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ताओ के श्री मुख की और उनके असहनीय दर्द की सूत्र बताते है कि मथुरा जनपद में इस बार वार्ड स्तर पर भी सक्रिय कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर उन को टिकट वितरित किये गए है जिनका कांगेस से कोई लेना देना भी नहीं रहा है या वो सक्रिय कार्यकर्त्ता नहीं रहे...भीषण गर्मी ऊपर से अपमान यही वजह है कि सक्रिय कार्यकर्त्ता अपने घरो से निकलने में भी गुरेज कर रहे है।
               वर्षो से कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य कर रही महिला कार्यकर्ताओ को टिकट ना मिलने से व्यथित है उन्होंने पार्टी की रीती नीति को जनता के बीच जोर शोर से प्रचारित किया नगर में पार्टी का कद बडाया किन्तु पार्टी ने उनका कद घटा दिया अब देखना है कि क्या असंतुष्ठो को सन्तुष्ट कर पायेगी कांग्रेस।   
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शुक्रवार, 29 जून 2012

              मथुरा निकाय चुनाव भाजपा में घमाशान 

  दाड़ी वाले के हाथ में गरसा और गोस्वामी के हाथ में फरसा 

   कैसे जीतेगी राजेश की मनीषा मोतारमा.......?

मथुरा। भाजपा का विधान सभा में ब्राहमण कार्ड फेल हो जाने के बाद निकाय चुनावो में वैश्य प्रत्याशी का चुनावो में उतारा जाना तय था इसी क्रम में मनीषा गुप्ता को नगर का प्रत्याशी घोषित किया गया जिसके चलते विरोध के स्वर मुखर हो गये जिससे कोसीकला व ब्रन्दावन सीटो की मुफ्त में बली चढ़ गयी भाजपा से मथुरा से नगर के दो बार अध्यक्ष रहे राजेश गुप्ता अपनी पत्नी मनीषा गुप्ता को टिकट तो हासिल कर ली कुर्सी हासिल कैसे करेगे...यह एक विचारणीय प्रश्न है।
मथुरा सीट पर भाजपा से विधायक व मंत्री रह चुके एक दाड़ी वाले अपने को व्यपारियो का नेता कहने वाले कार्यकर्ताओ के अरमानो का गला घोट कर अपनी राजनैतिक धार व धाक रखने में माहिर हर जगह सुर्खियों में बने रहने के चक्कर में संघटन को जिले में से  ख़त्म करने पर आमादा है।विधान सभा चुनावो में भी मथुरा सीट से देवेन्द्र कुमार शर्मा भी दाड़ी वाले बाबा को रास नहीं आये पिछले निकाय चुनावो में नवीन मित्तल भी पसन्द नहीं आये जो उनकी हार का मुख्य कारण बनी इनसे पहले प्रदीप गोस्वामी की टिकट फ़ाइनल हो चुकी को एक पत्रकार के सहयोग से कटवायी गयी इस बार मथुरा में निकाय चुनावो में अध्यक्ष पद के लिये मनीषा गुप्ता के नाम से बोखलाये दाड़ी वाले ने ब्रन्दावन में मुकेश चतुर्वेदी व हरिओम शर्मा की जहा टिकट होने नहीं दी वही कोसीकला में चोधरी पूरन सिहं एडवोकेट की फ़ाइनल टिकट कटवाकर उधोग जगत के अपने आप को भाजपा का वरिष्ठ नेता कहने वालो के मुंह पर एक तमाचा ऐसा मारा है कि पुरे भाजपा व संघ के नेताओ में घमासान मच गयी है ऐसे में मनीषा गुप्ता का निकाय चुनाव की मथुरा सीट को जीतना काँटों भरे ताज के समान हो गयी है क्योकि जहा दाड़ी वाला गरसा लेकर हरवाने के लिए कमर कस ली है वही सुनीता गोस्वामी को टिकट ना मिलने से नाराज उनके पति प्रदीप गोस्वामी भी भाजपा की बैंक वोट को काटने पर आमादा है जबकि कार्यकर्ताओ में इस दाड़ी वाले नेता को लेकर काफी आक्रोश है पूर्व में भी ये काग्रेस के लिए काम किया था ये दाड़ी वाला काग्रेस का एजेंट है और इस बार भी ऐसा ही होने वाला है इस बार कार्यकर्ताओ ने प्रदेश व राष्ट्रीय नेताओ को अवगत भी कराया था कि इस दाड़ी वाले के रहते जनपद में  संघटन ख़त्म हो रहा है इसके वावजूद भी टिकटों के वितरणों में हुई धाधली से कार्यकर्त्ता आपे से बाहर है कार्यकर्ताओ का तो यहा तक कहना है कि  तो जनपद के वरिष्ठ नेता कहने वालो को त्यागपत्र दे देना चाहिए या इस दाड़ी वाले का निष्कासन करवाना चाहिए।
    अब सवाल उस भाजपा का है जो अपना जनाधार खो चुकी है उसे वापस कैसे लाये किन्तु घर के विभिषनो से कैसे निपटा जाये अब राजेश गुप्ता अपनी पत्नी मनीषा गुप्ता को लेकर चिन्तित है कि मोतरमा को जिताया कैसे जाये।
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सोमवार, 25 जून 2012

पटेल थाम सकते है सपा का दामन......?

मथुरा। दुलमुल होती निकाय चुनावो की लेट घोषणा ने जहा सभी दलों का गडित बिगाड़ा वही सपा व् भाजपा के लिए मथुरा एव कोसीकला प्रतिष्ठा  का प्रश्न बन गये है जहा भाजपा कोसी में दंगो में शान्ति  बहाली के लिए सारात्मक भूमिका निभाने वाले की पक्षधर है वही सपा बिना संबल के गूर्जर जाति से हरी सिंह पटेल पर दाव लगाने की भूमिका में नजर आ रही है जिसकी नगर में जोरो से चर्चाओ का बाजार गर्म है ।
       व्ही भगवत रूहेला को भाजपा दमदार प्रत्याशी के रूप में नहीं आंक रही है इसकी मुख्य वजह यह भी बतायी जा रही है कि रूहेला कग्रेसी माईंन्ड है अयोध्या दंगे में संघ कार्यकर्ताओ की गिरफ़्तारी में अहम भूमिका निभायी थी जिससे यह साफ हो चला है कि भाजपा जाट प्रत्याशी के रूप में चोधरी पूरन सिंह एडवोकेट को लेकर कुछ ज्यादा गंभीर बतायी  जा रही है सूत्रों की माने तो मथुरा सीट पर भाजपा वैश्य प्रत्याशी के भरोसे मथुरा में खोया जनाधार वापस लाने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है 
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शनिवार, 28 अप्रैल 2012

               फेसबुक से विधायक नदारत.......?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के स्वागत में लगे काग्रेस के लोगो को, पाकिस्तान परस्त कटुए जैसा एक भड़काऊ समाचार मथुरा जनपद के एक विधायक को फेसबुक पर टैग करना महगा पड़ गया है इसे देखकर कुछ बुध्दजीवी वर्ग ने आपत्ति युक्त कमेन्ट भी किया अब उक्त विधायक की खूब छिछर लेदा हो रही है जो विधायक फेसबुक पर छाया रहता था, अब आठ रोज से फेसबुक से नदारत है इसे लेकर मुस्लिम समुदाय में विधायक के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त है  
                                                                                             नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
                                                                                    http.//www.samaysapeksh.com

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

            उम्मीद तो है 
इस  नई सुबह की आहट से,
क्या  रात  का जादू टूटेगा,
 क्या वक्त निंगू हो जाएगा,
 होंटो से  तरन्नुम  फूटेगा,
 उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

ये बात सयाने कहते है,
हर खव्वाब की मंजिल होती  है,
 नारगिस भी इक दिन हंसती  है,
 हर आंसू  बनता  मोती है,
 एक गीत जर्मी से उठता है,
 आवाज  फलक तक जाती है,
 जब मह -मह मेह बरसता है,
हर शाख हरी हो जाती है,
मोसम तो आते रहते है,
क्या ऐसी रुत भी आयेगी,
जब धरती छम-छम नाचेगी,
दुख दर्द कजा ले जाएगी,
उम्मीद तो है, उम्मीद तो है,

जब प्यास बड़ी हो जाती है,
पत्थर भी पिघलने  लगते है,
जंजीर खनकने लगती है,
अरमान मचलने लगती है ,
मै अहले -खिरद से पूछ,रहा 
रूपोश हकीकत कितने दिन,
लुटते-पिटते जीते -मरते,
आवाम की हालत कितने दिन,
तुम कहते हो इतनी सारी,
उम्मीदे करना ठीक नहीं,
सच ये भी है जो मांग रहे,
वो अपना हक है भीख नहीं,
ये तुमको जेब नहीं देता,
ऐसे मै तुम खामोस रहो,
क्यों बैठे हो मेरे साथ कहों,
उम्मीद तो है,उम्मीद तो है,

शिवकुमार अर्चन 














  

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

                      काग्रेस  कार्यकर्ताओ का दर्द 
               विधायक से छुव्ध जमीनी कार्यकर्त्ता 

मथुरा। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में काग्रेस प्रत्याशी को अल्प मतों से मिली विजय का श्रेय मात्र स्यम अपने विकास कार्यो की वजह मानने से जमीनी कार्यकर्त्ता छुव्ध है हकीकत यह है कि आम जमीनी कार्यकर्त्ता अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है क्योकि काग्रेस पार्टी के सगठन में अपनी वजूद न होते हुए भी अपने को कार्यकर्त्ता मान कार्य किया ऐसा कोई बूथ नहीं जिस पर काग्रेस को वोट न पड़ा हो जबकि उन जगह प्रदीप माथुर के विकास १० वर्षो में शून्य है।
कार्यकर्ताओ का कहना है कि विधायक काग्रेस को अपनी जागीर समझने लगे है। सेवादल जैसे अग्रिम संघठन के अध्यक्ष व प्रदेश पदाधिकारी जहाँ विधायक की गैस एजेंशी के कर्मचारी है। दूसरी ओर विधायक के साथ व काग्रेस के कार्यक्रमों में भी एकाधिकार रखते है जिससे जमीन से जुड़े कार्यकर्त्ता अपनी वेदना किसी से कह भी नहीं सकते २१ अप्रेल को लखनऊ में हाईकमान को समीक्षा बैठक में रिपोर्ट जानी है वह झूठी व भ्रामक अखबारी होनी है।
           वही हाल शहर कमेटी का है जो की अधक्ष बनने के उपरांत भी आज तक अपनी कार्यकारणी घोषित नहीं कर पाये चमचो का कल भी बोलबाला था और आज भी बोलबाला है कई तो ऐसे जमीनी कार्यकर्त्ता है जो अपना सब कुछ लुटा कर भुखमरी व बेरोजगारी के कगार पर है विधायक यदि असलियत से वाखिफ होना चाहते है तो जमीनी कर्कर्ताओ के हाल चाल व उनके छेत्र में भ्रमण कर आत्मीयता दिखाये वर्ना आम जमीनी कार्यकर्त्ता शान्त न बैठ कर अपने हक़ के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है 
                                                                                   hppt.//www.samaysapeksh.com 

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

     देवी माँ का विशाल जागरण खारन की घटिया पर आज 
मथुरा। कोतवाली रोड स्थित महोली की पोर खारन की घटिया पर युवा मित्र मण्डली 
व्दारा प्रथम देवी माँ का विशाल जागरण का आयोजन आज रात आठ बजे से किया जा रहा है।
आयोजको व्दारा मथुरा की धर्म परायण जनता से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
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रविवार, 18 मार्च 2012

            चोकने वाला फैसला जयंत का 22 को......? 


मथुरा । लोकदल से मांट के विधायक जयंत फैसला लेने में देरी का कारण विचारो और राजनितग्यो की राय जानने में जुटे है । 22 मार्च को महत्वपूर्ण फैसला लेने की बात कही है बुद्जीवी वर्ग का मानना है कि यदि जयंत विधायक पद से इस्तीफा देते है तो राजनैतिक हत्या होगी और संसाद पद से इस्तीफा सिर्फ दो वर्ष का वनवास हो सकता है । इस असमंजस की घडी में आख़िरकार जयंत क्या नया गुल खिलाते है ये भी फैसला राजनैतिक गलियारों में चोकने वाला होगा ।
                                                                                                      नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी 
                                                                                            http.//www.samaysapeksh.com

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

                      एक प्रत्याशी का दर्द, और जनता की सहानुभूति  
डा.अशोक अग्रवाल का छह वर्ष बसपा में वनवास ख़त्म हुआ और सपा ने आंसू भी पोछ दिये, अब जनता की भी सहानुभूति लाजमीय है सर्व समाज की सहनुभूति भी काविले तारीफ रही उम्मीद के मुताविक वोटो का प्रतिशत कम होना शुभ संकेत है, पर इस धुरी में भाजपा से प्रत्याशी रहे डा.देवेन्द्र कुमार शर्मा मतदान के आधार पर डा. अशोक के लिए सिरदर्द जरुर है ।
आज से छह वर्ष पूर्व बसपा पार्टी ने डा.अशोक अग्रवाल को एक ताकत के रूप में पार्टी में शामिल किया और मथुरा-वृन्दावन विधान सभा छेत्र से वादे के मुताविक टिकट भी दिया और बिना पूछे टिकट काट कर प.देवेन्द्र गोतम को दे दिया इस दंश को झेला और पार्टी के फैसले को स्वीकार भी किया । पार्टी के लिए पांच वर्ष निस्वार्थ कार्य भी किया फिर एक बार बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा इस बार भी डा.अशोक से काट कर वृन्दावन की चेयरमैन पुष्पा शर्मा को दे देने से डा.अशोक आहत हो उठे और समाजवादी का दामन थाम लिया । अब जनता ने डा.अशोक अग्रवाल के साथ कितनी सहानुभूति निभायी ये तो वक्त ही बतायेगा- आमीन    
                            कुर्सी की चाह में हम छह वर्ष तक रोते रहे,
                               बेवफा वो निकले बदनाम हम होते रहे,
                              कुर्सी की मदहोशी का आलम तो देखिये,
                             धूल चेहरे पर थी और आईना हम धोते रहे, 
                                                                                      नरेन्द्र एम.चतुर्वेदी
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