रविवार, 11 दिसंबर 2011

अब लोकपाल बिल पर विपक्ष भी अन्ना के साथ ,कांग्रेस अकेली पड़ी- शिखर आकाश

 आज जंतर मंतर पर जो नज़ारा इस देश के लोगों ने देखा शायद वह एतिहासिक ही कहा जायेगा टीम अन्ना और खुद अन्ना अब तक जिन राजनीतिज्ञों से दूर भाग रहे थे.वही आज अन्ना और उनके सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर भ्रष्टाचार और मजबूत जनलोकपाल बिल के मुद्दे पर एक साथ एक मंच पर खड़े थे .खुद अन्ना  और टीम अन्ना के सदस्यों  ने आज यह महसूस किया के वह कितनी बड़ी गलती कर चुके हैं काश  यदि इस बारे में पहले सोचा होता तो आज अन्ना के इस आन्दोलन की दिशा और दशा ही अलग होती.जितना भी विपक्ष जंतर-मंतर पंहुचा बहुत है और विभिन्न राजनातिक दलों के सदस्यों जिस तरह इस खुले मंच और खली बहस में बढ़ चड कर हिस्सा लिया वह काबिले तारीफ ही रहा .स्वयं अन्ना भी इस बात को समझ रहे थे की इस देश के विभिन्न राजनेतिक दलों के आने से उनकी ताक़त में इजाफा हुआ है.
सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस को भी इस मंच पर आमंत्रित किया गया था किन्तु कांग्रेस ने आज एक स्वर्णिम अवसर खो दिया उसे जनता के बीच में आकार अपनी बात और अपना पक्ष रखने का भरपूर मौका टीम अन्ना  ने दिया था.किन्तु कांग्रेस को शायद डर था के कंहीं उसकी किरकिरी विपक्ष और जनता के सामने ना ही जाये परन्तु खुली बहस में अनुपस्थित रह कर अब कांग्रेस अकेली पड़ गयी है .अब यह स्थिति कांग्रेस के लिए और खतरनाक हो गयी है सरकार को इस आन्दोलन से उठने वाली चिंगारियों का अंदाज़ा हो गया होगा
.सरकार की अनुपस्थिति पूरे देश को नागँवार गुज़री है और जनता में इस बात को लेकर खासी  नाराजगी भी है कांग्रेस के इस रवये से सरकार की नियत पर शक है किन्तु अन्ना  हजारे और उनकी टीम ने सरकार को अपनी मंशा भी जाता दी है की यदि सरकार जनलोकपाल बिल को लाने में आनाकानी करती है तो वह अब विपक्ष को साथ लेकर इस देश की जनता के साथ इस देश की प्रत्येक जेल को भर देंगे जिसका   सारा ज़िम्मा सरकार का होगा .क्रमशः  

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