सोमवार, 26 दिसंबर 2011

          भाजपा का असमंजस कही ब्राहमणों का भ्रम न बन जावे...?


मथुरा ! बसपा द्वारा प्रत्याशी बदलने के बाद रविकांत गर्ग की भाजपा में दावेदारी दुसरे वैश्यों से कही भरी पड़ रही थी किन्तु इसी दैरान पार्टी के ब्राहमण नेतृत्व ने अपनी विसात बिछा दी है ! सुना जा रहा है कि स्वयं को आहत अनुभव कर रहे सोहन लाल शर्मा, एस.के शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, आदि सभी सम्भावित दावेदार ''बिल्ली खाये नहीं तो लुद्काए  '' की  भूमिका में आ गये है ! अवसरवादी राजनीति के माहिर पंडित श्यामसुंदर शर्मा (विधायक माट) अपने लगुभ्राता कृष्ण कुमार शर्मा 'मुन्ना' को मथुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी के रूप में देखने के लिए साम-दंड-भेद से जुट गये है ! बताया जा रहा है कि दोनों भाइयो के मतभेद पाट लिए गये है और प. श्यामसुंदर शर्मा किसी भी कीमत पर मथुरा सीट से अपने भाई कृष्ण कुमार शर्मा को भाजपा प्रत्याशी देखना चाहते है ! यदि ऐसा हो गया तो ब्राहमण वोट पुष्पा और मुन्ना में से किसे चुनेगे ? आशा तो यही है कि तब श्याम के बसपा सम्पर्क पुष्पा को पार्टी के अन्दर ही पटखनी देगे ! यो मुन्ना का भाजपा प्रत्याशी होना बसपा का गर्भपात होगा !

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