रविवार, 17 जनवरी 2010

माकपा नेता ज्योति बसु का निधन

वयोवृद्ध माकपा नेता औपश्चिबंगापूर्मुख्यमंत्रज्योति बसु का यहाँ निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। बसु ने आज सुबह 11.47 बजे अंतिम साँस ली। बसु स्वतंत्र भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले पहले नेता थे। वाम मोर्चे की समन्वय समिति के अध्यक्ष विमान बोस ने दोपहर करीब 12.30 बजे कहा-मुझे आपको यह बुरी खबर देना है कि ज्योति बसु अब हमारे बीच नहीं हैं। भावुक हुए बोस ने कहा कि ज्योति बसु अब इस दुनिया में नहीं हैं।वे पिछले 17 दिन से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। बसु के निधन की घोषणा के साथ ही यहाँ सीपीएम दफ्तर में झंडा झुका दिया गया। न्यूमोनिया के संक्रमण के बाद एक जनवरी को बसु को एएमआरआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें छह जनवरी से जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। इस दौरान बसु की हालत लगातार अस्थिर बनी रही। पिछले कुछ दिनों से उनके सारे महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

नहीं होगा अंतिम संस्कार : गौरतलब है कि ज्योति बसु का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। उनकी इच्छा के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर मेडिकल के छात्रों के अध्ययन के लिए दे दिया जाएगा। बसु अपने कई अंग दान कर चुके हैं। इसके अलावा नेत्रदान के लिए डॉक्टरों की टीम अस्पताल पहुँच गई है।

सधे और संस्कारवान नेता : केंद्रीगृह मंत्री पी. चिदंबरम ने माकपा नेता को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का सधा हुआ और संस्कारवान नेता बताया। उन्होंने कहा बसु का जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध : राज्यसभा में नेता प्रतिपक्भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा बसु उच्च श्रेणी के नेताओं में से थे। वे अपनी विचारधारा, अपने लोग और अपने आदर्शों के प्रति सदा प्रतिबद्ध रहे। यही वजह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबी पारी खेली।

हान नेता और देशभक्त चला गया : केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ज्योति बसु के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा बसु के रूप में देश ने एक महान नेता और देशभक्त खो दिया।

बसु जैसा दूसरा नेता नहीं : पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने बसु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा बसु जैता नेता तो अब तक भारतीय राजनीति में हुआ है और न ही आगे होगा।

पीएम की कुर्सी को मारी ठोकर : माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने बसु को याद करते हुए कहा वे भारत के ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने पार्टी के कहने के बाद प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। अपने इस निर्णय पर वे टिके रहे।

प्रधानमंत्री से ऊँचा स्थान : राजद प्रमुख लालूप्रसाद यादव ने बसु के निधन को गहरी क्षति बताया। उन्होंने कहा बसु भले ही प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन हम उन्हें प्रधानमंत्री पद से ऊँचा स्थान देते थे। यह उन्हीं के बूते की बात थी कि पोलित ब्यूरो के मना करने पर उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया।

...तो होते दूसरे हालात : कांग्रेस के महासचिव दिग्विजने कहपोलित ब्यूरचाहता तबसु जरूर देश के प्रधानमंत्री बनते। उन्होंने कहा ऐसा होने पर आगे एनडीए की सरकार नहीं बनती और देश के हालात दूसरे होते।

1 टिप्पणी:

  1. jyoti basu sahab ki maut dukhad hai . aaj k rajnetaon ko unse prerna leni chahiye aur pradhanmantri ko bhi chahiye ki vah bhi american samrajyvaad ki chakri chhod kar desh ki janta k baare min soche unko yah samajhna chahiye kii acche aur bure marna sabhi ko hai accha hokar mare to acchi bat hogi .
    jyoti basu ka jeevan charite nayi pidhi k liye prerna shrotr hona chahiye.

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